(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

सभापर्व ~ महाभारत | Mahabharat Sabha Parv In Hindi


॥ श्रीः ॥
2.42. अध्यायः 042
Mahabharata - Sabha Parva - Chapter Topics
श्रीकृष्णस्याग्रपूजामसहमानानां शिरसि पदमाहितमिति सहदेववचनश्रवणेन शिशुपाल स्य कोपोदयः॥ 1॥
Mahabharata - Sabha Parva - Chapter Text

`वैशम्पायन उवाच॥

गाङ्गेयेनैवमुक्तस्तु शिशुपालश्चुकोप तम्।
क्रुद्धं सुनीथं दृष्ट्वाऽथ सहदेवोऽब्रवीत्तदा॥ 2-42-1(13064)
मतिपूर्वमिदं सर्वं चेदिराज मया कृतम्।
तन्मे निगदतस्तत्त्वं कारणादत्र मे शृणु॥ 2-42-2(13065)
स पार्थिवानां सर्वेषां गुरुः कृष्णोऽपरो न हि।
तस्मादभ्यर्चितोऽस्माभिः सर्वे संमन्तुमर्हथ॥ 2-42-3(13066)
यो वा सहते कश्चिद्राज्ञां सबलवाहनः।
क्षिप्रं युद्धाय निर्यातु तस्य मूर्ध्न्याहितं पदम्॥ 2-42-4(13067)
एवमुक्तो मया हेतुरुत्तरं प्रब्रवीतु मे। 2-42-5(13068)
वैशम्पायन उवाच॥
ततो न व्याजहारैषां कश्चिद्बुद्धिमतां सताम्॥ 2-42-5x(1463)
मानिनां बलिनां राज्ञां मध्ये सन्दर्शिते पदे।
एवमुक्ते सुनीथस्य सहदेवेन केशवे॥ 2-42-6(13069)
स्वभावरक्ते नयने कोपाद्रक्ततरे कृते।
तस्य कोपं समुद्भूतं ज्ञात्वा भीष्मः प्रतापवान्॥ 2-42-7(13070)
आचचक्षे पुनस्तस्मै कृष्णस्यैवोत्तरान्गुणान्।
स सुनीथं समामन्त्र्य तांश्च सर्वान्महीक्षितः॥ 2-42-8(13071)
उवाच वदतां श्रेष्ठं इदं मतिमतां वरः।
सहदेवेन राजानो यदुक्तं केशवं प्रति।
तत्तथेति विजानीध्वं भूयश्चात्र विबोधत॥ ॥ 2-42-9(13072)

इति श्रीमन्महाभारते सभापर्वणि अर्घाहरणपर्वणि द्विचत्वारिंशोऽध्यायः॥ 42 ॥


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